मेरे “धवल” अंतर्मन पर,
कभी “केसरिया’ की तरुणाई बिखरी,
कभी किसी ने हरियाली का “हरा” रंग डाला |
चक्र “अशोक” की नीलिमा लेकर मैंने भी,
अंतर्मन में ही “तिरंगा” सजा डाला|
रंगों के महाकुम्भ “होली” पर्व की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं|
“स्वच्छ रहिये,स्वस्थ रहिये”
“भारत माता की जय|जय हिन्द|वन्दे मातरम्|”
कभी “केसरिया’ की तरुणाई बिखरी,
कभी किसी ने हरियाली का “हरा” रंग डाला |
चक्र “अशोक” की नीलिमा लेकर मैंने भी,
अंतर्मन में ही “तिरंगा” सजा डाला|
रंगों के महाकुम्भ “होली” पर्व की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं|
“स्वच्छ रहिये,स्वस्थ रहिये”
“भारत माता की जय|जय हिन्द|वन्दे मातरम्|”
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