जी हाँ|बात हो रही है “बजरंगी भाईजान” की|एक ऐसी फिल्म जिसकी शायद कोई कल्पना भी नहीं कर सकता|एक मूक पाकिस्तानी बच्ची,एक नवयुवक “हनुमान” भक्त और एक जिंदादिल पत्रकार,इन तीनों के इर्द-गिर्द घुमती हुई इस फिल्म की पटकथा बहुत ही बेहतरीन ढंग से लिखी गयी है|दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के दृश्य तो सामान्यतया हरेक फिल्म में दिख जाते हैं लेकिन कश्मीर और उसके आसपास के इलाकों का जिस तरह से फिल्मांकन किया गया है,वह अद्भुत है| “धरती के स्वर्ग” कश्मीर की खूबसूरती इस फिल्म में पूर्ण रूप से निखर कर सामने आई है या यूँ कहा जाये की सामने लायी गयी है|वैसे वर्तमान समय में जब चारों ओर इस बात की दौड़ लगी है कि किसकी फिल्म ज्यादा कमाई कर रही है,इस प्रकार की फिल्मों का परदे पर आना एक सुखद एहसास देता है|फिल्म को रुपहले परदे पर आये आज तीन दिन हो गए हैं,लिहाजा कहानी तो सबको पता चल ही गयी है|व्यावसायिक सिनेमा और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में इस प्रकार की फिल्में समाज को एक सही दिशा प्रदान कर सकती हैं|एक ना बोल सकने वाली बच्ची,जिंदगी की जद्दोजहद में फँसा हुआ एक युवक और एक अंजान मुल्क,इन तीनों के संयोग से फिल्म की कहानी बेहतर बनती है|एक ऐसी कहानी जिसका सच होना इस देश में वास्तव में बहुत ही असंभव है|अरे!!!कौन है इस देश में जो फिल्म के “बजरंगी” की तरह ही बच्ची की मदद करेगा और उसे उसके परिवार से मिलाने के लिए अपनी जान खतरे में डालकर एक अंजान मुल्क में जायेगा|भगवान बजरंगबली के भक्त तो हजारों मिल जायेंगे पर उनमे से किसी का भी आचरण “बजरंगी” से तनिक भी मेल नहीं खायेगा|वस्तुतः आज तो स्थिति यह हो गयी है कि एक समय के बाद लोग अपने माता-पिता को ही अकेला छोड़ देते हैं,समय आने पर अपने परिवार से ही मूंह फेर लेते हैं तो फिर एक “अपरिचित” के लिए कौन इतना जोखिम उठायेगा|पर वास्तव में इस फिल्म के कहानीकार का कार्य सराहनीय है जिन्होंने आज के इस परिदृश्य में भी इस तरह की भावनात्मक,मानवतावादी और सकारात्मक लेखन का उत्कृष्ट प्रयास किया है और इसी की वजह से ही यह फिल्म और भी अच्छी लग पड़ती है|वैसे रिलीज़ से पहले इस फिल्म के साथ विवादों को भी जोड़ने की काफ़ी साज़िश की गयी थी|कुछ लोगों को फिल्म के नाम से तकलीफ हो रही थी पर सिनेमाघरों में आने के बाद जहाँ इस फिल्म ने अपने शीर्षक को चरितार्थ किया है वहीँ धर्म के तमाम ठेकेदारों के गाल पर करारा तमाचा जड़ा है|इस फिल्म के जरिये यह सन्देश देने का भी बखूबी प्रयास किया गया है कि “मानव-मात्र” की सेवा और सहायता करना ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है|
खैर,इस फिल्म को बहुत ही बेहतरीन तरीके से बनाया गया है और फिल्म से जुड़े सभी लोगों की इसके लिए सराहना की जानी चाहिए| कहा जाता है, “सिनेमा,समाज का आइना होता है”,पर हम यही उम्मीद करते हैं कि यह फिल्म सारे समाज को एक आइना दिखाए और जिस उद्देश्य को ध्यान में रखकर फिल्म बनायीं गयी है,यह उसमे सफल भी हो|मैंने तो देख लिया,अब आप भी देख ही आइये|
खैर,इस फिल्म को बहुत ही बेहतरीन तरीके से बनाया गया है और फिल्म से जुड़े सभी लोगों की इसके लिए सराहना की जानी चाहिए| कहा जाता है, “सिनेमा,समाज का आइना होता है”,पर हम यही उम्मीद करते हैं कि यह फिल्म सारे समाज को एक आइना दिखाए और जिस उद्देश्य को ध्यान में रखकर फिल्म बनायीं गयी है,यह उसमे सफल भी हो|मैंने तो देख लिया,अब आप भी देख ही आइये|
“जय श्री राम”
"स्वच्छ रहिये,स्वस्थ रहिये"
“भारत माता की जय|जय हिन्द|वन्दे मातरम्|”
"स्वच्छ रहिये,स्वस्थ रहिये"
“भारत माता की जय|जय हिन्द|वन्दे मातरम्|”