Sunday, 19 July 2015

“बजरंगी भाईजान:सोच से परे और उम्मीद से कहीं बेहतर”

      जी हाँ|बात हो रही है “बजरंगी भाईजान” की|एक ऐसी फिल्म जिसकी शायद कोई कल्पना भी नहीं कर सकता|एक मूक पाकिस्तानी बच्ची,एक नवयुवक “हनुमान” भक्त और एक जिंदादिल पत्रकार,इन तीनों के इर्द-गिर्द घुमती हुई इस फिल्म की पटकथा बहुत ही बेहतरीन ढंग से लिखी गयी है|दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के दृश्य तो सामान्यतया हरेक फिल्म में दिख जाते हैं लेकिन कश्मीर और उसके आसपास के इलाकों का जिस तरह से फिल्मांकन किया गया है,वह अद्भुत है| “धरती के स्वर्ग” कश्मीर की खूबसूरती इस फिल्म में पूर्ण रूप से निखर कर सामने आई है या यूँ कहा जाये की सामने लायी गयी है|वैसे वर्तमान समय में जब चारों ओर इस बात की दौड़ लगी है कि किसकी फिल्म ज्यादा कमाई कर रही है,इस प्रकार की फिल्मों का परदे पर आना एक सुखद एहसास देता है|फिल्म को रुपहले परदे पर आये आज तीन दिन हो गए हैं,लिहाजा कहानी तो सबको पता चल ही गयी है|व्यावसायिक सिनेमा और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में इस प्रकार की फिल्में समाज को एक सही दिशा प्रदान कर सकती हैं|एक ना बोल सकने वाली बच्ची,जिंदगी की जद्दोजहद में फँसा हुआ एक युवक और एक अंजान मुल्क,इन तीनों के संयोग से फिल्म की कहानी बेहतर बनती है|एक ऐसी कहानी जिसका सच होना इस देश में वास्तव में बहुत ही असंभव है|अरे!!!कौन है इस देश में जो फिल्म के “बजरंगी” की तरह ही बच्ची की मदद करेगा और उसे उसके परिवार से मिलाने के लिए अपनी जान खतरे में डालकर एक अंजान मुल्क में जायेगा|भगवान बजरंगबली के भक्त तो हजारों मिल जायेंगे पर उनमे से किसी का भी आचरण “बजरंगी” से तनिक भी मेल नहीं खायेगा|वस्तुतः आज तो स्थिति यह हो गयी है कि एक समय के बाद लोग अपने माता-पिता को ही अकेला छोड़ देते हैं,समय आने पर अपने परिवार से ही मूंह फेर लेते हैं तो फिर एक “अपरिचित” के लिए कौन इतना जोखिम उठायेगा|पर वास्तव में इस फिल्म के कहानीकार का कार्य सराहनीय है जिन्होंने आज के इस परिदृश्य में भी इस तरह की भावनात्मक,मानवतावादी और सकारात्मक लेखन का उत्कृष्ट प्रयास किया है और इसी की वजह से ही यह फिल्म और भी अच्छी लग पड़ती है|वैसे रिलीज़ से पहले इस फिल्म के साथ विवादों को भी जोड़ने की काफ़ी साज़िश की गयी थी|कुछ लोगों को फिल्म के नाम से तकलीफ हो रही थी पर सिनेमाघरों में आने के बाद जहाँ इस फिल्म ने अपने शीर्षक को चरितार्थ किया है वहीँ धर्म के तमाम ठेकेदारों के गाल पर करारा तमाचा जड़ा है|इस फिल्म के जरिये यह सन्देश देने का भी बखूबी प्रयास किया गया है कि “मानव-मात्र” की सेवा और सहायता करना ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है|
        खैर,इस फिल्म को बहुत ही बेहतरीन तरीके से बनाया गया है और फिल्म से जुड़े सभी लोगों की इसके लिए सराहना की जानी चाहिए| कहा जाता है, “सिनेमा,समाज का आइना होता है”,पर हम यही उम्मीद करते हैं कि यह फिल्म सारे समाज को एक आइना दिखाए और जिस उद्देश्य को ध्यान में रखकर फिल्म बनायीं गयी है,यह उसमे सफल भी हो|मैंने तो देख लिया,अब आप भी देख ही आइये|

                          “जय श्री राम”
                     "स्वच्छ रहिये,स्वस्थ रहिये"
              “भारत माता की जय|जय हिन्द|वन्दे मातरम्|”

Monday, 13 July 2015

“मेरे मन की बात”

जीवन के इस उलझन में,ना जाने किस ओर जाना है|
साधारण सा जीवन जीना है,या कुछ अद्भुत करके मर जाना है|
अलग-अलग सब पथ बतलाते,अंततः हमें ही तो उस पर चलना है|
कुछ कर लें अब देश की खातिर,क्योंकि आज नहीं तो कल मरना है|
सोचता हूँ मन में कभी,अपने देश को “बुराइयों” से आज़ाद करा दूँ|
भारत माँ का सम्मान वापस लाकर,देश को पुनः “जगद्गुरु” बना दूँ|
सोचता हूँ मैं तो “युवा” हूँ,एक नयी क्रांति का आगाज़ करूं|
“वायु” के वेग से बहकर,देश-प्रेम का संचार करूं|
पर इस भ्रष्ट व्यवस्था के सम्मुख,मैं असहाय सा हो जाता हूँ|
जन-कल्याण की भावना है मन में,पर कुछ भी नहीं कर पाता हूँ|
अनुभव की कमी की दुहाई दे,मुझे पीछे कर दिया जाता है|
और जिनके लिए पैसा ही सब कुछ है,देश को उन्हीं के हाथों में धकेला जाता है|
“कालिख” पुते हुए चेहरे हैं,दामन में भी हजारों “दाग” हैं|
देश-प्रेम में ज़हर घोलते,ये ही वो “कालिया नाग” हैं|
मत भूलो तुम देश के आकाओं,घमंड ना किसी का रह पाया है|
भारत माँ को लज्जित करने वाले,सभी को “संतानों” ने सबक सिखाया है|
मजबूर हूँ मैं इस व्यवस्था के आगे,मुझे आपका साथ चाहिए|
देश की प्रगति और पुनरुद्धार के लिए,जनता का विश्वास चाहिए|
आओ मिलकर कदम बढ़ाएं,देश-प्रेम का अटूट भाव जगायें|
एक स्वच्छ सुशासन देकर,भारत माँ का मान बढायें|

                            “स्वच्छ रहिये,स्वस्थ रहिये”
             “भारत माता की जय|जय हिन्द|वन्दे मातरम्|”

Sunday, 5 July 2015

"बारिश:कहीं राहत कहीं आफत"

     बारिश!!! एक ऐसा प्राकृतिक घटनाचक्र जिसका शायद हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है|गर्मी के तपते मौसम और लगातार चढ़ते हुए पारे के बीच यदि कही कोई बारिश की हल्की सी भी फुहार आ जाये तो उस अनुभव को शब्दों में बयां कर पाना तनिक मुश्किल है|ऐसा लगता है मानो जल बिन तडपती मछली को लबालब पानी से भरे तालाब में छोड़ दिया गया हो|वर्तमान में प्रत्येक भारतीय जो इस देश में मौजूद है,इसी सुख का अनुभव कर रहे है|मानसून ने उसके लिए किये गए पूर्वानुमानो को धता बताते हुए निर्धारित तिथि के दो दिन बाद देश में प्रवेश किया|इस खबर से ही लोगो को राहत महसूस हुई और वे ज्यादा बेसब्री से इसका इंतजार करने लगे|जानकारों ने बताया कि इस बार मानसून औसत से कम रहने वाला है लेकिन मानसून के आगमन के बाद के आंकडों पर गौर करें तो ये भविष्यवाणी बेईमानी लगती है|आकाश में छाये काले बदरा जिस तरह से बरसे हैं,उसने मौसम पंडितो को फिर से विचार करने पर मजबूर तो किया ही है|इस पहली बारिश से जहाँ एक वर्ग बहुत ही उत्साहित और राहत महसूस कर रहा है तो कुछ लोगों के लिए यही बारिश आफत भी ले कर आई|उत्तर से दक्षिण हो या पूर्व से पश्चिम,देश के हर कोने में ये बादल ऐसे बरसे कि जून माह के लिए तय आंकड़ों से 28% अधिक बारिश रिकॉर्ड की गयी|जहाँ इस बारिश से लोगों को भयंकर गर्मी से निजात मिली,सुकून की साँसे फिर से हलक में लौट आयीं,वही दूसरी ओर कृषक वर्ग भी इस प्रकार की बारिश को लेकर बहुत आनंदित हुआ|देश के “अन्नदाता" ने अपना कार्य आरम्भ कर दिया है|देखा जाए तो आज की तारीख में सही मायनों में वे ही “मेक इन इंडिया” कर रहे हैं और भगवान भी इसमें लगातार उनका ही साथ दे रहे हैं|ये बात अलग है कि इन अन्नदाताओं की अहमियत सरकार के लिए उतनी है नहीं जितनी होनी चाहिए|इसका कारण भी है|इस देश में “कृषक” वर्ग ही एकमात्र वर्ग है जो कि उत्पादन स्वयं करता है परन्तु उसके उत्पाद का मूल्य निर्धारण कोई और ही करता है|खैर,इस बारिश ने जहाँ एक ओर लोगों को सुखद एहसास तो कराया ही,वहीँ दूजी ओर सरकार की सारी तैयारियों की पोल खोल दी|जम्मू-कश्मीर हो या पूर्वोत्तर के राज्य,गुजरात हो या महाराष्ट्र,अधिकांश जगहों पर बाढ़ के हालात बन गये हैं|देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तो इस पहली बारिश में ही हाल बेहाल हो गयी|घुटनों तक भरे हुए पानी ने पूरे शहर को रोक कर रख दिया|जिन नालियों की सफाई पर बी.एम.सी. ने करोड़ों फूंक डाले,वे ही दगा दे गयी और मुंबई शहर एक टापू सा बन गया|आनन-फानन में सरकार को लोगों से अपील करनी पड़ी कि बहुत जरुरी होने पर ही घर से बाहर निकले|सारी योजनाओं का बंटाधार हो गया|जिस गुजरात के “विकास मॉडल” के चलते मोदी जी प्रधानमंत्री बने है,वहां भी बाढ़ के कमोबेश वही नज़ारे देखे गए जैसा की मुंबई में|आलम तो कुछ यूँ रहा कि जब बात की गयी जिम्मेदार लोगों से तो उनके बयान सुनकर तो हंसी के फव्वारे फूट पड़े|किसी ने कहा कि दस दिनों की बारिश एक दिन में हो गयी,इसलिए ये हालत बने|कोई तो घर में घुसे पानी के स्तर को लेकर बयान देते दिखे कि असल में पानी की गहराई 1 फीट ही थी,न की 3 फीट|वास्तव में,ये तो महज पहली ही बारिश थी और वो भी तब जबकि बादल अपने पूरे “फॉर्म” में नहीं थे|हालात इससे और भी बदतर हो सकते हैं|इसी प्रकार की ही कई मूलभूत समस्याएं हैं जिन्हें अगर चिन्हित करके प्रभावी ढंग से उनका समाधान खोजा जाये तो सारे शहर अपने आप ही “स्मार्ट” हो जायेंगे|तब शायद “स्मार्ट सिटी’ की जरुरत ही ना पड़े|
        खैर,ये बरसात का मौसम है|बीमारियाँ भी लाता है|सावधानी बरतते हुए बारिश का मजा लीजिये|सरकारी निर्देशों का भी पालन जरुर करिए|और हाँ,पकोड़े-चटनी का लुत्फ़ लेने में बिल्कुल भी मत शर्माइये|
“स्वच्छ रहिये,स्वस्थ रहिये’
“भारत माता की जय|जय हिन्द|वन्दे मातरम्|”