Monday, 13 July 2015

“मेरे मन की बात”

जीवन के इस उलझन में,ना जाने किस ओर जाना है|
साधारण सा जीवन जीना है,या कुछ अद्भुत करके मर जाना है|
अलग-अलग सब पथ बतलाते,अंततः हमें ही तो उस पर चलना है|
कुछ कर लें अब देश की खातिर,क्योंकि आज नहीं तो कल मरना है|
सोचता हूँ मन में कभी,अपने देश को “बुराइयों” से आज़ाद करा दूँ|
भारत माँ का सम्मान वापस लाकर,देश को पुनः “जगद्गुरु” बना दूँ|
सोचता हूँ मैं तो “युवा” हूँ,एक नयी क्रांति का आगाज़ करूं|
“वायु” के वेग से बहकर,देश-प्रेम का संचार करूं|
पर इस भ्रष्ट व्यवस्था के सम्मुख,मैं असहाय सा हो जाता हूँ|
जन-कल्याण की भावना है मन में,पर कुछ भी नहीं कर पाता हूँ|
अनुभव की कमी की दुहाई दे,मुझे पीछे कर दिया जाता है|
और जिनके लिए पैसा ही सब कुछ है,देश को उन्हीं के हाथों में धकेला जाता है|
“कालिख” पुते हुए चेहरे हैं,दामन में भी हजारों “दाग” हैं|
देश-प्रेम में ज़हर घोलते,ये ही वो “कालिया नाग” हैं|
मत भूलो तुम देश के आकाओं,घमंड ना किसी का रह पाया है|
भारत माँ को लज्जित करने वाले,सभी को “संतानों” ने सबक सिखाया है|
मजबूर हूँ मैं इस व्यवस्था के आगे,मुझे आपका साथ चाहिए|
देश की प्रगति और पुनरुद्धार के लिए,जनता का विश्वास चाहिए|
आओ मिलकर कदम बढ़ाएं,देश-प्रेम का अटूट भाव जगायें|
एक स्वच्छ सुशासन देकर,भारत माँ का मान बढायें|

                            “स्वच्छ रहिये,स्वस्थ रहिये”
             “भारत माता की जय|जय हिन्द|वन्दे मातरम्|”

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