Sunday, 5 July 2015

"बारिश:कहीं राहत कहीं आफत"

     बारिश!!! एक ऐसा प्राकृतिक घटनाचक्र जिसका शायद हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है|गर्मी के तपते मौसम और लगातार चढ़ते हुए पारे के बीच यदि कही कोई बारिश की हल्की सी भी फुहार आ जाये तो उस अनुभव को शब्दों में बयां कर पाना तनिक मुश्किल है|ऐसा लगता है मानो जल बिन तडपती मछली को लबालब पानी से भरे तालाब में छोड़ दिया गया हो|वर्तमान में प्रत्येक भारतीय जो इस देश में मौजूद है,इसी सुख का अनुभव कर रहे है|मानसून ने उसके लिए किये गए पूर्वानुमानो को धता बताते हुए निर्धारित तिथि के दो दिन बाद देश में प्रवेश किया|इस खबर से ही लोगो को राहत महसूस हुई और वे ज्यादा बेसब्री से इसका इंतजार करने लगे|जानकारों ने बताया कि इस बार मानसून औसत से कम रहने वाला है लेकिन मानसून के आगमन के बाद के आंकडों पर गौर करें तो ये भविष्यवाणी बेईमानी लगती है|आकाश में छाये काले बदरा जिस तरह से बरसे हैं,उसने मौसम पंडितो को फिर से विचार करने पर मजबूर तो किया ही है|इस पहली बारिश से जहाँ एक वर्ग बहुत ही उत्साहित और राहत महसूस कर रहा है तो कुछ लोगों के लिए यही बारिश आफत भी ले कर आई|उत्तर से दक्षिण हो या पूर्व से पश्चिम,देश के हर कोने में ये बादल ऐसे बरसे कि जून माह के लिए तय आंकड़ों से 28% अधिक बारिश रिकॉर्ड की गयी|जहाँ इस बारिश से लोगों को भयंकर गर्मी से निजात मिली,सुकून की साँसे फिर से हलक में लौट आयीं,वही दूसरी ओर कृषक वर्ग भी इस प्रकार की बारिश को लेकर बहुत आनंदित हुआ|देश के “अन्नदाता" ने अपना कार्य आरम्भ कर दिया है|देखा जाए तो आज की तारीख में सही मायनों में वे ही “मेक इन इंडिया” कर रहे हैं और भगवान भी इसमें लगातार उनका ही साथ दे रहे हैं|ये बात अलग है कि इन अन्नदाताओं की अहमियत सरकार के लिए उतनी है नहीं जितनी होनी चाहिए|इसका कारण भी है|इस देश में “कृषक” वर्ग ही एकमात्र वर्ग है जो कि उत्पादन स्वयं करता है परन्तु उसके उत्पाद का मूल्य निर्धारण कोई और ही करता है|खैर,इस बारिश ने जहाँ एक ओर लोगों को सुखद एहसास तो कराया ही,वहीँ दूजी ओर सरकार की सारी तैयारियों की पोल खोल दी|जम्मू-कश्मीर हो या पूर्वोत्तर के राज्य,गुजरात हो या महाराष्ट्र,अधिकांश जगहों पर बाढ़ के हालात बन गये हैं|देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तो इस पहली बारिश में ही हाल बेहाल हो गयी|घुटनों तक भरे हुए पानी ने पूरे शहर को रोक कर रख दिया|जिन नालियों की सफाई पर बी.एम.सी. ने करोड़ों फूंक डाले,वे ही दगा दे गयी और मुंबई शहर एक टापू सा बन गया|आनन-फानन में सरकार को लोगों से अपील करनी पड़ी कि बहुत जरुरी होने पर ही घर से बाहर निकले|सारी योजनाओं का बंटाधार हो गया|जिस गुजरात के “विकास मॉडल” के चलते मोदी जी प्रधानमंत्री बने है,वहां भी बाढ़ के कमोबेश वही नज़ारे देखे गए जैसा की मुंबई में|आलम तो कुछ यूँ रहा कि जब बात की गयी जिम्मेदार लोगों से तो उनके बयान सुनकर तो हंसी के फव्वारे फूट पड़े|किसी ने कहा कि दस दिनों की बारिश एक दिन में हो गयी,इसलिए ये हालत बने|कोई तो घर में घुसे पानी के स्तर को लेकर बयान देते दिखे कि असल में पानी की गहराई 1 फीट ही थी,न की 3 फीट|वास्तव में,ये तो महज पहली ही बारिश थी और वो भी तब जबकि बादल अपने पूरे “फॉर्म” में नहीं थे|हालात इससे और भी बदतर हो सकते हैं|इसी प्रकार की ही कई मूलभूत समस्याएं हैं जिन्हें अगर चिन्हित करके प्रभावी ढंग से उनका समाधान खोजा जाये तो सारे शहर अपने आप ही “स्मार्ट” हो जायेंगे|तब शायद “स्मार्ट सिटी’ की जरुरत ही ना पड़े|
        खैर,ये बरसात का मौसम है|बीमारियाँ भी लाता है|सावधानी बरतते हुए बारिश का मजा लीजिये|सरकारी निर्देशों का भी पालन जरुर करिए|और हाँ,पकोड़े-चटनी का लुत्फ़ लेने में बिल्कुल भी मत शर्माइये|
“स्वच्छ रहिये,स्वस्थ रहिये’
“भारत माता की जय|जय हिन्द|वन्दे मातरम्|”

No comments:

Post a Comment